Best Hindi Theatre Monologues

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First of all, Here is the Best Hindi Theatre Monologues. This is the monologues that is performed by a great actors. So you can prepare these monologues for auditions or self-practice. These are monologues of Hindi plays, written by the great writers of indian cinema.
As a result, from here you can select any monologue based on gender, age, character requirements. And practice. You can perform it in auditions or workshops or anywhere on stage. In short the monologues will be effective in your acting practice and auditions.

A Good Monologue:

A well written monologue makes them remember you. Good audition monologues will do:

Stay below two minutes: Two minutes is enough time to show your baggage. In fact, auditors and casting directors make their decision after 30 seconds, perhaps even less.

You have a clear objective: You can’t stand there and talk. You have to actively talk to someone you have imagined, and you will be trying to get something from them.

There is a different beginning, middle and end:
A start: a strong first sentence to grab attention.
A middle: lots of juicy ingredients.
An end: a strong finish.
When there is a structure in your monologue, the auditor or casting director is more likely to remember you.

Conflict occurs: Drama cannot exist without conflict. Who wants to see everyone play with?
It can be boring. And also interesting.

मुहम्मद: हमारी अज़ीज़ रियाया। हाकिमे-अदालत, काजी-ए-मुल्क का फैसला आपने सुना। हमारे चंद कारिंदों की वजह से एक बिरहमन के साथ जो जुल्म हुआ, आपने देखा। हमने उस जुर्म का इक़बाल करके इंसाफ-पसंदगी और हक़ का रास्ता इख़्तियार किया है। मजहबी तफरीक की वजह से, टुकडो में बिखरी हुई हमारी सल्तनत की तवारीख में, आज का यह लम्हा हमेशा जिंदा रहेगा। इस पाक लम्हे को गवाह रखकर हम चंद अल्फाज़ तावारीख के पन्नो पर दर्ज कराना चाहते है। हमेशा से हमारी ख्वाहिश रही है कि हमारी सल्तनत में सबके साथ एक जैसा सुलूक हो। खुशियाँ हों, शादमानी हों और हर शख्स को हक़ और इन्साफ हासिल हो। अपनी रियाया के अमनो-अमान ही नही, बल्कि जिंदगी के हम ख्वाहिशमंद है.....जिंदा-दिली और खुशहाली से भरपूर जिंदगी। हम अपनी अज़ीम सल्तनत की भलाई के लिए एक नया कदम उठाना चाहते है। हमारी तजवीज़ है कि इसी बरस हम अपना दारुल-खिलाफा दिल्ली से दौलताबाद लें जाएँ।   हाँ, आप लोगो को हमारी तजवीज़ सुनकर जरुर हैरत हुई होगी। लेकिन हम सबको बता देना चाहते है कि ये किसी मगरूर सुलतान का बेमानी खब्त नही है इसकी ठोस वजह है। दिल्ली हमारी सल्तनत की उतरी सरहद के करीब आबाद है, जहाँ हर लम्हे मुगलों के हमलो का खतरा दरपेश रहता है। और आप जानते ही है कि हमारी सल्तनत दूर दक्खिन तक फैली हुई है। एक दौलताबाद ही हमारी सल्तनत के बाहर सूबों के मरकज में आबाद है। जहाँ से हम अपनी लम्बी छोड़ी सल्तनत के हर कोने पर हुकूमत की मज़बूत गिरफ्त कायम, रख सकते है। इससे भी अहम बात ये है कि दौलताबाद हिन्दुओं की आबादी है। हम अपने दारुल-खिलाफे को वहां ले जा कर हिन्हुओं और मुसलमानों में एक मज़बूत रिश्ता कायम करना चाहते है। इस नेक काम की खातिर हम आप सबको दौलताबाद आने की दावत देते है। दावत दे रहे है, हुक्म नही। जिन्हें हमारे ख्वाबों की सदाकत पर ज़रा भी यकीन हो, वही आयें। महज़ उनकी मद्दत से हम एक ऐसी मिसाली हुकूमत कायम करेंगे जिसे देखकर सारी दुनिया दंग रह जाएँ। हमारे ख्वाबों की ताबीर बनने वालो खुदा हाफ़िज़।

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About the Author

Stagey Actor
I am an Actor by profession. A few years after graduating in theater arts, I realized that I should do something to promote art. Just since then my aim is to share my knowledge to all people. I hope all of you are with me. ART IN MY HEART

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